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वर्तमान समय मे शिक्षा को, नौकरी, डिग्री या अक्षर- ज्ञान के परिपेक्ष मे देखा जा रहा है | आज बड़े - बड़े विश्वविघालय जहां 100 प्रतिशत प्लेसमेंट का ढ़िढ़ोरा पीट रहे है वही छोटे बोर्ड़ या विघालय हर हाल मे फस्ट या सेकण्ड डिवीजन दिलाने के दावे कर रहे है तो सरकारी योजनाकार सबको साक्षर करने के लिए अरबों - खरबो की योजना बना रहे है | आज हर जगह अक्षर, हाईस्कूल, इन्टर या नौकरी का व्यवसाय हो रहा है कोई शिक्षा की बात ही नहीं करता है |
भारत मे जिस परिपेक्ष मे शिक्षा का अर्थ था उसे हम भुल चुके है | भारत मे शिक्षा का मतलब व्यक्ति के सम्पुर्ण विकास के रूप मे रहा है | यहां एक बच्चे के लिए शिक्षा वही काम करती है, जो काम किसी पेड़ के छोटे से बीज़ के लिए हवा, पानी, मिट्टी और धुप करती है | जिस प्रकार हवा, पानी, मिट्टी और धुप के बिना कोई बीज़ अंकुरित हो कर विशाल वृक्ष नहीं बन सकता उसी प्रकार कोई शिशु शिक्षा के अभाव मे महत्त्वपुर्ण व्यकित या महान नागारिक नहीं बन सकता है | शिक्षा जन्म से शुरू होकर जीवन भर चलती है |
शिक्षा से आत्त्मविश्वास पैदा होता है |
शिक्षा से जिम्मेदारी पैदा होती है |
शिक्षा से संशय मिटता है |
शिक्षा से चरित्र पैदा होता है |
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